श्री हरि हर सेवा समिति राजिम द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत भक्ति कथा का आयोजन नगर के शंकर नगर में किया जा रहा है, वृंदावन धाम से पधारे महाराज आचार्य श्री कृष्णकांत जी के मुखारविंद से भागवत भक्ति कथा का वाचन किया जा रहा है, कल भागवत कथा में रूखमणी विवाह का आयोजन हुआ जिसमे बड़ी संख्या में भक्तगण भागवत कथा का श्रवण करने पहुंचे, इस दौरान महाराज श्री ने बताया कि श्री कृष्ण "योगेश्वर" है, उन्होंने धरती लोक में आकर धरती का भार कम किया है, श्री कृष्ण जी ने 16,108 रानियों के साथ विवाह किया और सबकी कृष्ण जी को पति के रूप में पाने की इच्छा थी, उन्हे श्री कृष्ण ने पूर्ण किया।
भगवान के समक्ष पहुंचने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती है, उन्होने आगे कहा कि विवाह दो आत्माओं का पवित्र मिलन है, इसे प्रेम एवं संस्कार में पिरोकर रखिए भूलकर भी लड़ाई, झगड़ा, ईर्ष्या, द्वेष न पालें यह मार्ग इंसान को पतन की ओर ले जाता है, संबंध में प्रगाढ़ता लाने के लिए पति पत्नी में विश्वास का होना अति आवश्यक है, जिस तरह ईश्वर को पाने के लिए उन पर श्रद्धा विश्वास करना आवश्यक है, ठीक उसी तरह परिवार चलाने के लिए विश्वास जीवन का मुख्य आधार स्तंभ है, दुख और सुख छाव और धूप की ही तरह है, दुख है, तो चिंता न करें सुख भी जरूर लौटकर आएगा भगवत भक्ति पर विश्वास रखें और श्री कृष्ण जी पर सब छोड़ दें ईश्वर का स्मरण करते रहे ईश्वर में इतनी शक्ति है, कि बुरा दिन भी देखते देखते टल जाता है, इस मौके पर रूखमणी विवाह की झांकी दिखाई गई, और भजन में भक्त झूमते नजर आए, श्रीमद् भागवत भक्ति कथा का श्रवण करने रोजाना बड़ी संख्या में भक्तगण कथा पंडाल में पहुंच रहे है।