प्रदेश सरकार भूपेश कैबिनेट की बैठक में कई बड़े निर्णय लिये गये। बस्तर में “बस्तर फाइटर्स फोर्स” गठन का ऐलान हुआ, तो वहीं आवासहीनों को राजीव नगर आवास योजना के तहत 1 लाख की घोषणा हुआ। स्कूल-कालेज खोलने को हरी झंडी मिली तो बजट पर भी मुहर लगायी गयी। इन सबके बीच एक और बड़े फैसले शराब को लेकर भी हुआ। कोरोना काल में राज्य सरकार ने शराब पर “कोरोना टैक्स” हटाने का निर्णय लिया। राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद शराब की कीमतों के कम होने की अटकलें लगने लगी थी। लेकिन शराब प्रेमियों को कोरोना टैक्स हटने के बाद भी कीमतों में कोई भी राहत नहीं मिलेगी। दरअसल सरकार ने शराब पर कोरोना टैक्स के नाम पर वसूले जाने वाले पैसे को पढ़ाई और कृषि के नाम पर वसूली का निर्णय लिया है ।
शराब पर एक तरफ कोरोना टैक्स हटाया गया है, तो दूसरी तरफ सरकार ने इस पर लगने वाले उपकर को कोरोना के बजाय शिक्षा और कृषि क्षेत्र के लिए वसूलना शुरू कर दिया है। यानी शराब पर कोरोना सेस हटाकर सरकार ने उसकी कीमत जितनी घटाई थी, उस पर उतना ही सेस एग्री एजुकेशन सेस जोड़ दिया है। यानी सेस हटाने और नया सेस जोड़ने से शराब की कीमत पर असर निल हो गया। हालांकि शराब के पैसे को पढ़ाई और कृषि में लगाने पर कई लोग चुटकी भी ले रहे हैं।