गरियाबंद के देवभोग सिंचाई अनुविभाग में 8 साल पहले 54 करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुए उरमाल जल प्लावन योजना खरीफ की सिंचाई के लिए पानी देने में फेलियर साबित हुई है, इतना ही नहीं अधिग्रहण किए जमीन का मुआवजा भी कई किसानो को नही दिया जा सका है।
लिहाजा किसान नहरों में दलहन तिलहन की खेती लेना शुरू कर दिए है, दरअसल जलप्लावन योजना बारहों माह बहने वाली नदियों में बनाया जाता है, लेकिन यहां पर कम पानी बहाव वाले तेल नदी में इसे बना कर शासन के करोड़ो रुपए की बर्बादी कर दिया गया, योजना के सपोर्ट के लिए बनाये जाने वाला ब्यपवर्तन योजना का काम ओडिसा सीमा विवाद के चलते बंद कर दिया गया, जिसके बाद से 27 गांव के 3186 हेक्टेयर सिंचाई सुविधा देने का दावा करने वाली यह योजना भी फेल साबित हुई, मामले में जिम्मेदार अफसर कैमरे के सामने आने से इंकार कर रहे है, पर बता रहे की नहर लाइनिंग कार्य का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसके बनते ही सिंचाई सुविधा मिलने लगेगी।