हलशष्ठी (कमरछठ) संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से रखा जाने वाला विशेष व्रत, इस अवसर पर माताओं ने पूरे दिन उपवास रखा और सगरी बनाकर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की।
पूजन के दौरान महिलाओं ने कमरछठ व्रत की कथा सुनी, कथा के माध्यम से बताया गया, कि इस व्रत के पीछे संतान के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना जुड़ी हुई है, माताएं भगवान शिव और माता पार्वती से अपनी संतान को बलराम के समान श्रेष्ठ, स्वस्थ और बलशाली बनाने की प्रार्थना करती हैं।
सगरी पूजन के दौरान महिलाओं ने भगवान शिव, माता गौरी, श्री गणेश, श्री कार्तिकेय और नंदी भगवान की पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति के लिए मंगल कामना की।
कमरछठ हलशष्ठी व्रत में पसहर चावल का विशेष महत्व माना जाता है, दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाओं ने पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियों का सेवन कर व्रत का पारण किया, पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह नजर आया, कमरछठ के मौके पर महिलाएं बड़ी संख्या में एकत्रित हुईं और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की।ल, धार्मिक आस्थाएं और परंपरा से जुड़े इस पर्व पर माताओं ने अपनी संतान के सुखी, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।